डाक्टर से जो शावकों को सिखाते है दहाड़ना, माँ की तरह सीने से लगाकर दूध पिलाते है डाक्टर


लोकेश व्यास, एएनएम न्यूज, जोधपुर: मिलिए ऐसे डाक्टर से जो शावकों को सिखाते है दहाड़ना, तीन शावकों को जन्म देकर चल बसी मादा पैंथर, अब माँ की तरह सीने से लगाकर दूध पिला कर पाल रहे डाक्टर राठौड़।

यह है डॉ श्रवण सिंह जिनके साथ कैलास और रियाज जैसे लॉयन का बचपन इनके साथ बिता खेलते खेलते यह बड़े हुए। आज भी डॉ श्रवण की आवाज और पैरों की आहट पहचानते है और अब जोधपुर शहर में के पशु चिकित्सयालय में पिछले 10 दिनों से 3 पैन्थर शावकों के साथ डॉ श्रवण रह रहे है। इतना ही नहीं वह उन्हें सीने से लगाकर अमरीका से मंगाया गया विशेष दूध पिला रहा है और उनके साथ रोजाना खेलकूद कर रहे है। क्या है पूरी खबर और आखिर क्यों चिकित्सक इन पैंथरो के शावकों से खेल रहा है इन शावक को दहाड़ना सीखा रहा है देखते हैं इस पूरी खबर में।

हम इस समय है माचिया बायोलॉजिक पार्क में और मिलये ये है जोधपुर के माचिया बायोलॉजिकल पार्क के रेस्क्यू सेंटर के डॉक्टर श्रवणसिंह राठौड़ जिन्होंने पैंथर के तीन शावकों को पिछले 10 दिनों से मां की तरह पाला हैं। वे उन्हें सीने से लगाकर दूध पिलाते हैं। धूप में खिलाते हैं। डॉक्टर राठौड़ ने पिछले आठ साल में 26 पैंथर रेस्क्यू किए हैं। इसमें से 22 को स्वस्थ कर जंगल में छोड़ दिया। दरअसल, सेणा गांव की पहाड़ी पर मादा पैंथर ने तीन शावकों को जन्म दिया था 10 दिन पहले मादा पैंथर पर अन्य पैंथर ने हमला कर दिया, जिसमें उसके मुंह और पैरों पर चोटें आई थीं उदयपुर के सीसीएफ ने उसकी तलाश में सेणा और कोठार गांव में सर्च ऑपरेशन भी चलाया था। जब शावकों का रेस्क्यू किया गया तब ये चार दिन से भूखे थे। इन्हें अमेरिका से मंगवाया गया दूध पाउडर पिलाने की कोशिश की गई, लेकिन शावकों ने नहीं पिया राठौड़ बताते हैं, “इनकी जान बचाना महत्वपूर्ण था तभी पत्नी ने कहा कि इन्हें सीने से लगाओ। हो सकता है कि धड़कन सुनने के बाद दूध पी लें। यह आइडिया काम आ गया।” ऐसे में डॉ. राठौड़ ने उन्हें मां की तरह सीने से लगाकर दूध पिलाने का प्रयास किया। उनके इस प्रयास के बाद शावकों ने दूध पी लिया। डॉ. राठौड़ इन शावकों को हर चार घंटे में दूध पिलाते हैं। सीने से लगाकर उनके साथ सोते हैं। रोज करीब एक घंटा उनके साथ खेलते हैं। नियमित मेडिकल जांच कर रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता बढ़ाने के लिए दवा दे रहे हैं। उनकी देखभाल के लिए सेंटर में ही रह रहे हैं। डॉ. राठौड़ ने बताया कि मादा पैंथर ने छह शावकों को जन्म दिया, लेकिन किसी को दूध नहीं पिलाया। कमजोरी से 3 शावकों की मौत हो गई। शावकों के दूध नहीं पीने से मन नहीं लगता था। आज आरटी के तीन बच्चे- सवा दो साल का कैलाश, एक साल 8 माह का रियाज और सवा साल की लक्ष्मी हैं। डॉ. राठौड़ अब तक 24 पैंथरों को रेस्क्यू कर बचा चुके हैं। एक बार तो एक शावक को इन्फेक्शन से बचाने के लिए इंसानों के बच्चों के आईसीय में भर्ती करवाया था, उसके लिए भी अमेरिका से दूध मंगवाया था।


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