कानपुर की ऐश्वर्या को है ससुराल वालो का इंतज़ार

चंद्र कांत तिवारी, एएनएम न्यूज़, कानपुर: कानपुर की ऐश्वर्या को उसके ससुराल वाले अभी तक विदा कराने नहीं आ रहे हैं। वो मायके में है और विरह की पीड़ा में झुलस रही है। कानपुर प्राणि उद्यान वालों ने तय किया है कि अगर उसकी विदाई जल्दी नहीं होती है तो उसे एकाकी न छोड़ा जाय बल्कि मन बहलाने के लिये उसके बाड़े में नये मेहमान रख दिये जायें। चौंकिए मत। ऐश्वर्या कानपुर चिड़ियाघर की मादा जेब्रा का नाम है और उसकी ससुराल गुजरात के जूनागढ़ में है।

कानपुर चिड़ियाघर के दर्शकों को आजकल जेब्रा के बाड़े के पास से गुजरते समय फिजाओं में एक टीस सी महसूस हो रही है। यह टीस मादा जेब्रा ऐश्वर्या के दिल की है। दरअसल ऐश्वर्या का जीवन साथी गुजरात में है जिससे उसका रिश्ता सेण्ट्रल जू अथारिटी के एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत तय हुआ था। एक्सचेंज के तहत कानपुर चिड़ियाघर को गुजरात से लाॅयन मिल चुके हैं लेकिन गुजरात वाले अभी तक ऐश्वर्या को दुल्हन बनाकर नहीं ले गये हैं और वो अपनी विदाई की घड़ी का इन्तजार में एक -एक दिन अकेलेपन के अहसास के साथ गुजार रही है। बहरहाल कानपुर चिड़ियाघर प्रशासन भी अपनी बेटी को बोझ नही मान रहा है। उसने एक जेब्रा दम्पत्ति को ऐश्वर्या के बाड़े में साथ रखने की योजना बनायी है ताकि जेब्रा परिवार में बढोत्तरी हो और सभी का दिल बहल सके। उत्तर प्रदेश सरकार ने दक्षिण अफ्रीका से तीन जेब्रा जोड़े मंगाये हैं। कानपुर जू इनमें से एक जोड़ा हासिल करने की जुगत लगा ली है।

हालाॅकि कानपुर के वन्य प्रेमियों की बहुत पुरानी माॅग दक्षिण अफ्रीका से जिराफ मॅगाने की है लेकिन उसके विशालकाय शरीर के लिये बड़ा कण्टेनर मंगाना पड़ेगा जिसकी ढुलाई शिप से सम्भव होगी और इसका भाड़ा लगभग डेढ़ करोड रूपया पड़ेगा। फिलहाल कानपुर चिड़ियाघर इस भारी भरकम खर्च को उठाने की स्थिति में नहीं है इसलिये वो अफ्रीका से जेब्रा दम्पत्ति को ही ला पा रहा है जिसके लिये उसे कुल तैंतीस लाख खर्च करने पड़ेगें।

वाहनों के प्रदुषण से निजाद दिलाएगा कार्बोन कटर डिवाइस

चंद्र कांत तिवारी, एएनएम न्यूज, कानपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्धारा नौजवानो के लिए शुरू किया स्टार्ट अप को अब पंख लगने शुरू हो गए है | देश के नौजवान अब प्रधानमंत्री की इस योजना से प्रेरित होकर नित नए प्रयोग कर रहे है | स्टार्ट अप को आगे बढ़ाते हुए पुणे की “पाई” नामक कंपनी ने एक कार्बन कटर डिवाइस का ईजाद किया है | इस डिवाइस को प्रदुषण फ़ैलाने वाले वाहनों में लगाने से प्रदुषण पर रोक लग सकती है | फिलहाल “पाई” कंपनी की कार्बन कटर डिवाइस को भारत, जापान, चाइना, यूएस वा यूरोप में पेंटेंट करवाने के लिए अप्लाई किया गया है |

कानपुर में आईआईटी व एलुमिनाई आर्गनाइजेशन की प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पुणे से आये हुए इरफ़ान पठान शामिल हुए | इरफ़ान पुणे में “पाई” कंपनी के मालिक है जोकि स्टार्ट अप को बढ़ावा देते रहते है | मीडिया से बात करते हुए इरफ़ान ने बताया कि उनकी कंपनी द्वारा बनायीं गयी कार्बन कटर डिवाइस को किसी भी वाहन में लगाया जा सकता है | वाहनों में कार्बन कटर डिवाइस लगने के बाद डिवाइस धुएं को पाउडर में बदल देता है जिससे धुएं की बजाय केवल गैस ही बाहर निकलती है | सबसे ज्यादा हानिकारक तत्व पीएम 2 वा पीएम 4 को यह डिवाइस अपने अंदरलगे बॉक्स में स्टोर कर लेती है | डिवाइस लगने से गाड़ियों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है क्योकि डिवाइस डायरेक्ट धुएं को ट्रीट करता है | डिवाइस की टेस्टिंग एआरआई पुणे में हो रही है | यह डिवाइस अभी बाजार में उपलब्ध नहीं है क्योकि यह सीपीसी का एक जे आर है |

आजादी के 70 वर्ष बाद भी जहरीली पानी व्यवहार करने पर विवष है आसनसोल नगर निगम के वर्ड 19 के लोग

एएनएम न्यूज आसनसोल: राज्य की मुख्य मंत्री ममता बनर्जी के निर्देश को नज़रअंदाज़ कर नदी को नाला बनाया जा रहा है। साफ़ सुथरा नदी में गंदा पानी बहाने से नदी की हालत नाली से भी बतर बन चुकी है। वर्षो से रामजीवनपुर, कलिकापुर, गारुई, धणगाड पड़ा के बाशिंदे गुडगुडिया नदी (गारुई नदी) धर्मा जोड़ के किनारे स्थापित एक पेपर मिल से निकाला हुवा गन्दा पानी से परेशान है। सभी नियमो को ताख में रखते हुए मिल के गंदे रासायनिक युक्त पानी को नदी में बहाया जा रहा है। जिससे नदी के किनारे आदिवासी गांव जो की नदी की पानी पर निर्भर हैं उनके लिए नदी का जल जहर बन गया हैं। पानी इंतना प्रदूषित हो गया है की जनवरो के पिने के लायक नही रहा। कई जानवर इस प्रदूषित जल पिने से मर रहे है, इससे नाहाने से कई लोग बीमार हो गए एक बच्चे के आँखो में इन्फ़ेक्सन हो गया है। एक समय ऐसा था की नदी का जल ग्रमीण पिने के कार्य में लगाते थे परन्तु अभी तो धोने के कार्य तक नही रहा। वर्षो से इस गुदगुडिया नदी में पेपर मिल का पानी बहने से लगभग 10 गाव के लोग पानी के अभाव में उसी गंदे पानी का व्यवहार करते है और बीमारी के शिकार हो रहे है। इस नदी में गंदा पानी बहाने के खिलाफ कई राजनितिक पार्टी के लोगो की ओर से लिखित शिकायत की गई है किन्तु कोई करवाई नहीं की गयी। दर्ज़नो गांव के लोग आसनसोल जैसे प्रगतिशील कारपोरेशन इलाके में रहते हुए भी नारकीय जीवन जीने पर मजबूर है।

परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने किया शहर का दौरा

चंद्रकांत तिवारी, एएनएम न्यूज, कानपुर: उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने आज शहर का दौरा किया जहा उन्होंने पहले अधिकारियो के साथ सर्किट हाउस में बैठक की फिर झकरकटी बस अड्डे का औचक निरीक्षण करने के लिए निकल पड़े। इस दौरान टाटमिल चौराहे पर लगे भीषण जाम में लगभग आधे घंटे तक मंत्री का काफिला फसा रहा। उधर झकरकटी बस अड्डे पर निरीक्षण के नाम पर खाना पूर्ती करके निकल लिए। इस दौरान मीडिया से हुई बात चीत पर उन्होंने कहा की प्रदेश में बढ़ते प्रदूषण पर कहा की इसको लेकर पूरे प्रदेश में सी एन जी बसे चलाये जाने का प्लान है और 250 नई सी एन जी बसे उतार दी गयी है। साथ ही उन्हीने कहा की कुम्भ के लिए पूरे प्रदेश में 6000 बसें चलाई जाएँगी और महिलाओ के लिए पिंक और एको फ्रेंडली बसों की भी जल्द शुरुआत किये जाने का प्रस्ताव है। परिवहन विभाग में कर्मचारियों की कमी को भी जल्द पूरा किये जाने को लेकर फ़ाइल भेजी गयी है जल्द ही प्रक्रिया शुरू होगी।

गंगा को पूरी तरह स्वच्छ और निर्मल करके रहूंगी: उमा भारती

चंद्र कांत तिवारी, एएनएम न्यूज, कानपूर: कानपुर पहुंची उमा भारती ने सरसैया घाट से लेकर गंगा बैराज तक स्टीमर द्धारा गंगा में गिर रहे नालो का निरिक्षण किया | सीसामऊ नाले की टेपिंग होने के बाद गंगा में सीवरेज बंद होने पर उमा भारती ने ख़ुशी जाहिर की | मीडिया से बात करते हुए उमा भारती ने 84 में हुए के सिख दंगो पर कहा कि उस दंगे में कांग्रेस पार्टी के नेताओ का हाथ था | उस समय प्राइवेट मीडिया होता तो एक्सपोज हो जाता की किस तरह से भीड़ को उकसाते हुए लोग कह रहे थे कि मार डालो | 84 के दंगे में जो चश्मदीद गवाह थे उनके आधार पर सजाये हो रही है | इस केस में इतना लंबा समय लगा है इसलिए जिनके नाम आ रहे है उनपर सन्देह नहीं किया जा सकता | हम कांग्रेस मुक्त भारत की बात कर रहे है क्योकि बात सोच की है कि आप क्या सोच रखते हो | ऐसी सोच की आप लोगो को मार डालेंगे ऐसी घटना हुयी थी और आपने मार डालने की छूट दे दी | उमा भारती ने कहा की राजीव गाँधी ने कहा था की जब धरती कापती है तो बड़े बड़े पेड़ गिर जाते है इन सब बातो का जो परिणाम आया था उसमे कांग्रेस को अपने नैतिक आधार पर विचार करना है | सज्जन कुमार को उम्र कैद होने के बाद कुछ पार्टियों ने बहिस्कार किया है और वह शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुए |

उमा भारती ने कहा कि कांग्रेस पार्टी एक अंग्रेज़ द्धारा स्थापित संस्था है इसमें भारतित्व है ही नहीं अभी भी एक विदेशी महिला पार्टी का नेतृत्व कर रही है | अगर कांग्रेस पार्टी को वोट मिल जाता है तो वह इसलिए कि हमारी तरफ से कोई कमी छूट जाती है इसलिए जो तीन राज्यों का परिणाम आया है उससे हम बहुत सारी बातो को सोचेंगे |

गंगा पर उमा भारती ने कहा की गंगा स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए सब काम करना चाहते है लेकिन समझ में कमी है | आस्था से नहीं बल्कि समझ से निराकरण होगा| उमा भारती ने मीडिया से हाथ जोड़कर विनती करी की आप लोग यह मत समझ लेना की मै कानपुर से चुनाव लड़ूंगी मै बिलकुल चुनाव नहीं लड़ूंगी | मध्य प्रदेश में चुनावी हार पर उमा भारती ने कहा कि वंहा पर हमें सभी सीटों पर सामान वोट मिले जबकि कांग्रेस को कही कम कही ज्यादा वोट मिले | उमा भारती ने कहा की लोकतंत्र में यह मानसिकता रखना कि हमारी ही सरकारे हो यह सामंत वादी है लोकतंत्र में किसी की भी सरकार बन सकती है |

गंगा में गिरने वाले सीसामऊ नाले के बंद होने पर उमा भारती ने ख़ुशी जताते हुए कहा की यह नाला मेरे सपनो में आता था | मुझे लगता था की सीसामऊ नाले को मै किस तोप से उड़ाऊ | पूरी दुनिया में सीसामऊ नाले को लेकर हमारी बदनामी होती थी हमने उस नाले को ट्रीट किया और आज वह जीरो डिस्चार्ज पर है | उमा भारती ने साफ़ तौर पर कहा कि चाहे राजयोग से या हटयोग से|

कानपुर में प्रदूषण के कारण प्रवासी पक्षी कर रहे है गुजरात का रुख

चंद्र कांत तिवारी, एएनएम न्यूज़, कानपूर: देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहर कानपुर में इस बार विदेशी पक्षियों की आमद घट गयी है। एशिया के सबसे बड़े चिड़ियाघरों में शुमार कानपुर चिड़ियाघर में एक प्राकृतिक झील है और सर्दियों के मौसम में यहाॅ प्रवास करने पाॅच हजार से अधिक पक्षी सरहद पार करके आते हैं लेकिन इस बार प्रदूषण के कारण अधिकाॅश ने गुजरात का रूख कर लिया है।

प्रदूषण का असर उत्तर प्रदेश के पर्यटन उद्योग पर भी पड़ता दिख रहा है। छियत्तर हेक्टेअर क्षेत्र में फैले कानपुर चिड़ियाघर में एक विशाल प्राकृतिक झील भी है जिसमें शीतकालीन प्रवास के लिये विदेशी पक्षी आते हैं और उनकी अठखेलियाॅ देखने के लिये पर्यटकों का जमावड़ा लगता है। लेकिन इस बाद उनकी आमद बहुत कम दर्ज की जा रही है। इससे ज़ू प्रशासन में भी बेचैनी है। प्रथम दृष्टतया इसका कारण कानपुर और आसपास के इलाकों में फैला प्रदूषण माना जा रहा है। लगभग हर रोज कानपुर का एक्यूआई चार सौ से लेकर साढे चार सौ के बीच दर्ज किया जा रहा है। अब कानपुर वाले भले ही इस जहरीली हवा में साॅस लेने को मजबूर हों लेकिन खुले गगन में उड़ने वाले विदेशी मेहमानों को तो सरकारें मजबूर नहीं कर सकती इसलिये ये अपने डैने फैलाये गुजरात की तरफ मुड़ते देखे जा रहे हैं।

प्रदूषण के अलावा प्रवासी पक्षियों को दूसरा बड़ा खतरा मगरमच्छ के हमलों का है। ये विदेशी मेहमान जाड़े के मौसम में यहाॅ प्रजनन करते हैं और बसन्त ऋतु आने पर अपने नन्हें मुन्नों के साथ घर वापस लौट जाते हैं लेकिन पिछले कुछ सालों से यहाॅ मगरमच्छों की टोली ने आतंक मचाया हुआ है। वे धूप सेंकने के लिये झील के बाहर निकलते हैं और गीली रेत में भोजन के लिये केंचुए पकड़ने आयी चिड़िया पर झपट पड़ते हैं। यही नहीं, जलक्रीड़ा कर रहे पक्षियों को पता भी नहीं चलता कि पानी के भीतर उनका दुश्मन छुपा बैठा है। जरा सी चूक हुई नहीं कि वो अचानक प्रकट होकर झपट्टा मार देता है। किस्मत अच्छी हुई तो बच गये, वरना उनका मगरमच्छ के जबड़े में फॅसना तय हैै। इन आतंकी मगरमच्छों की खबर सरहद पार तक पहुॅच चुकी है और इसका असर भी प्रवासी पक्षियों की आमद पर पड़ा है।

मुंबई की आरे कॉलोनी में तेंदुए का आतंक

मुरारी सिंह मुंबई : मुंबई का आरे कॉलोनी बहुत ही बड़ा और घना जंगल है ।इसमें कई जंगली जानवर रहते हैं, और पिछले कई सालों में यहां जंगली जानवर से कई लोगों की मौत हो गई है ।समय-समय पर वन विभाग इनकी देखरेख करता है। बावजूद नेशनल पार्क, पवई झील ,और आरे कॉलोनी में बड़े पैमाने पर जंगली जानवर रहते हैं ।यहां आने जाने में काफी डर और जोखिम रहता है ,लेकिन मुंबई वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे से ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे जाने के लिए आरे कॉलोनी से पवई की तरफ सीधा रोड गया है। जिसके लिए यह रास्ता आवागमन से भरा रहता है ,आज तकरीबन 2:00 बजे के आसपास बीच रास्ते पर तेंदुआ आ गया और एक व्यक्ति को जख्मी कर दिया ।राहगीर अपनी मोटरसाइकिल छोड़कर पेड़ों पर चढ़ गए ,कई घंटे के तमाशे के बाद तेंदुआ जंगल की तरफ गया ,तो लोग अपने वाहन लेकर वहां से निकले ,यह तस्वीर देखकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे रोड के बीचो बीच बैठक के दुआ 15 से 20 मोटरसाइकिल सवार पेड़ों के ऊपर चढ़ गए । जिसमें एक शख्स बुरी तरह से जख्मी हो गया ,जिसे नजदीक के अस्पताल में एडमिट कराया गया वहीं वन विभाग के अधिकारियों को सूचित किया गया जिसके बाद उन लोगों ने जंगल की तरफ तेंदुए का रुख मोड़ फिर वहां से लोग निकल सके।

उच्च रक्त चाप दूर करेंगी शीत ऋतू की ये पांच सब्जियां

एएनएम न्यूज़ डेस्क: विश्व भर में उच्च रक्त चाप के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। यह विभिन्न कारणों से यह बीमारी होती है। पर इनमे दैनंदिन खाने की भी एक विशेष भूमिका है। शीतकाल एक मौसम है जिसमे काफी मात्रा में साग सब्जी पाए जाते हैं जिनमे उच्च रक्त चाप नियंत्रित करने की क्षमता होती है।

बिटमूल (चुकंदर ): इसमें पाया जानेवाला एंटी ऑक्सीडेंट उच्च रक्त चाप और कोलेस्ट्राल के परिमाण को नियंत्रित करता है। इसमें काफी परिमाण ने विटामिन ‘बी’ रहता है। यह स्नायुओं की कार्य क्षमता को बढ़ाने में भूमिका निभाता है। शोध से पता चला है की इसमें स्थित नाइट्रिक ऑक्साइड रक्तचाप को शिथिल एवं प्रसारित करने में सहायता करता है।

पालक साग: इस साग में काफी मात्रा में पोटैशियम और लिउटेइन पाया जाता है। ये दोनों उपादान रक्तचाप को कम करते हैं। इसके साथ ही ह्रदय रोग भी नियंत्रित करता है। इसमें पाये जाने वाले फोलिक एसिड तथा मैग्नेसियम रक्तचाप को कम करता है। इस साग में कैलोरी भी कम होती है। इसके कारन वजन काम करने में भी सहायक है।

गाजर: इसमें पाया जानेवाला पोटैशियम रक्तचाप को नियंत्रित करता है। इसका नियमित उपयोग स्ट्रोक से भी रक्षा करता है। इसे पकाकर या कच्चा खा सकते हैं और जूस निकलकर भी पी सकते हैं।

मेथी: मेथी साग एवं मेथी दोनों में काफी परिमाण में फाइबर पाया जाता है जो रक्त में पाए जानेवाले ख़राब कोलेस्ट्रॉल को कम करने तथा रक्तचाप को कम करने में भूमिका निभाता है।

मूली: इसमें भरपूर मात्रा में पोटैशियम पाया जाता है जो रक्त चाप कम करने में कार्यकारी भूमिका निभाता है। यह एक ऐसा सब्जी है जिसे सलाद बनाकर या सब्जी में भी खा सकते हैं। इसके साथ ही इसका जूस बनाकर भी पी सकते हैं।

तो आइये और इन सब्जियों का उपयोग कर हम निरोग रहें और ये नुस्खा सभी को बताएं तथा उन्हें भी निरोग रहने की सलाह दें।

पुरुलिया जिला के मदनडीह गावँ के पत्ते हरे नहीं काले होते है

एएनएम न्यूज आसनसोल : पुरुलिया जिला के नितुरिया ब्लॉक अंतर्गत मदनडीह गावँ के करीब स्थित पंचकोट पहाड़ पर बने बाबा ब्रिंची नाथ धाम पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पहले पर्वतारोही प्रेमी प्रशिक्षु रॉक क्लाइम्बिंग के लिए भी यहां आते है करीब 50 – 60 मीटर की दूरी पर ही स्थित स्पॉन्ज आयरन एंड पावर लिमिटेड कारखाने से उत्पन्न धुआँ, उड़ते छाई, बिन योजना फेंके जाने वाले छाई आदि के कारण उत्पन्न प्रदूषण से यहां के वातावरण को अकल्पनीय क्षति हो रही है।

यहां के निवासी वर्षों से ब्रिंची नाथ धाम की देखरेख, साफ सफाई में जुटे के कारण स्थानीय लोगे ने बताया कि इस मंदिर की स्थापना गढ़ पंचकोट (कालांतर में काशीपुर नरेश) वंशीय किसी राजा ने करवाया था। आज यहां कोलकाता, दुर्गापुर, आसनसोल, पुरुलिया, पासवर्ती झारखंड के विभिन्न भागों से सैलानी घुमने, पिकनिक करने के लिए आया करते हैं। प्रदूषण के बारे में दबी जुबान से स्वीकार करते हुए सफाई कर्मी सनातन बाउरी कहते हैं कि आखिर स्थानीय लोगों को रोजगार के साधन इस कारखाने से ही फिलहाल उपलब्ध हो रहा है।

सच बात तो ये है कि प्रदूषण के कारण यहां की वनस्पतियों के पत्ते कारखाने के उड़ते (फ्लाई ऐश ) काले छाई से ढक से गये हैं। खुद ब्रिंची नाथ धाम की जमीन और हर तरफ बिखरा काली रंग की परत इस बात की गवाह है कि प्रदूषण ने कितना और किस तरह से यहां की प्राकृतिक छटा को प्रभावित किया है। कारखाने की एक अजीब आवाज यहां कि प्राकृतिक शांति को भंग करता हुआ साफ सुनाई पड़ता है। बताया तो यहाँ तक जाता है कि कुछ विशेष औषधियों के सिर्फ यहीं प्राप्त होने वाले पौधे प्रदूषण के कारण लुप्तप्राय से हो गए हैं। और इशा से कई गाँव इस प्रदूषण के चपेट मे आने से लोगे बीमार हो रहे है| अगर रोका नहीं गया तो और लोगो को कैंसर जैसी बीमारी हो सकती है | ओरे परशान चुपी साधे है |

अब लोग आक्सीजन सिलेंडर और मुँह पर मास्क लगाकर चलेंगे

चंद्र कान्त तिवारी, एएनएम न्यूज़, कानपुर: कानपुर में एअर क्वालिटी इंडेक्स खतरे की सभी हदे पार कर चुका है यंहा पी एम 478 रिकार्ड किया गया है जो मानक से चार गुना अधिक है | इस मामले में अधिकारियो को जगाने के लिए एक एनजीओ ने अपने हाथो में आक्सीजन की बोतल लेकर कानपुर नगर निगम के बाहर प्रदर्शन किया एनजीओ के लोगो ने नगर आयुक्त को गुलाब की फूल देकर इससे अवगत कराया।

औधोगिक नगरी कानपुर वायु प्रदुषण में एक नंबर पर आ चुका है लेकिन इससे बचाने के लिए जिला प्रशाशन द्धारा कोई ऐसा इंतजाम नहीं किया जा रहा जिससे आम जनता को इससे निजात मिल सके | वायु प्रदुषण बढ़ने की वजह से कानपुर की हवा दिन प्रति दिन ज़हरीली होती जा रही है | लोगो में जागरूकता फ़ैलाने के लिए एक एनजीओ ने सकारात्मक कदम उठाते हुए कानपुर नगर निगम मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया | एनजीओ कार्यकर्ता अपने हाथो में बैनर पोस्टर व हाथो में आक्सीजन की बोतल और मुँह पर मास्क लगाकर लोगो को जागरूक कर रहे है | कार्यक्रम संचालक गौरव बाजपेई का कहना है कि जिस तरह से कानपुर में पेड़ो को तो काटा जा रहा है लेकिन नए पेड़ नहीं लगाए जा रहे है | केवल फूल पत्तियों वाले पेड़ ही लगाए जा रहे है लेकिन जीवनदायक पीपल व बरगद का पेड़ नहीं लगाया जा रहा है | अगर यही हालात रहे तो तो जिस तरह से चीन में लोग अपने हाथो में आक्सीजन की बोतल लेकर चलते है ठीक उसी तरह से यंहा भी वही स्थिति हो जाएगी |

नगर निगम मुख्यालय पर एनजीओ के लोगो ने प्रदर्शन करने के साथ ही नगर आयुक्त को गुलाब का फूल देकर वायु प्रदुषण से अवगत कराया | एनजीओ के लोगो ने आम नागरिको को गुलाब की फूल देकर उनको उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराया | लोगो को फूल देकर वायु प्रदुषण से अवगत कराने वाली चरनजीत का कहना है कि प्रदुषण ना फैले इसकी जिम्मेदारी नगर निगम के साथ ही आम नागरिको की भी है | अगर इसी तरह वायु प्रदुषण होता रहा तो एक दिन ऐसा आएगा जब हमारे बच्चे अपने हाथो में आक्सीजन सिलेंडर और मुँह पर मास्क लगाकर चलेंगे |